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Celebration of International Women’s Day 2017

आगाज ने मनाया अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस- 2017

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर पीपलकोटी स्थित आगाज के मुख्यालय में महिलाओं ने बैठक का आयोजन किया।

पीपलकोटी चमोली में अलकनंदा घाटी शिल्पी फैडरेशन (आगाज) ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर बैठक का आयोजन किया। बैठक की अध्यक्षता करते हुए श्रीकोट महिला मंगल दल की सदस्य सुभद्रा देवी ने कहा कि पहाड़ में महिलाएं जब तक आर्थिक रूप से सशक्त नहीं हो जातीं, तब तक उनके अधिकारों के संरक्षण की बात बेमानी है। उन्होंने कहा कि सामाजिक संस्था के रूप में लंबे समय से आगाज संस्था चमोली के दशोली ब्लाक में लगातार प्रयासरत है। आज भी महिला दिवस के मौके पर आगाज संस्था ने हमें बुलाकर कपूर कचरी जड़ीबूटी के दस-दस किलो बीज दिए हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि महिला दिवस छोटे-छोटे प्रयासों का बड़ा परिवर्तन लाने वाला दिन है। गडोरा गांव की मनोरमा देवी ने कहा कि महिलाओं और पुरुषों के बीच का भेद मिटाकर आज हमें अपने बेटों को खासकर शिक्षित करना होगा। पहाड़ों से पलायन को रोकने के लिए यह जरूरी है कि पहाड़ की पानी और मिट्टी का पहाड़ के विकास के लिए इस्तेमाल किया जाए।

इस अवसर पर संस्था के कार्यक्रम समन्वयक सुखबीर सिंह ने महिलाओं को संस्था की योजनाओं की जानकारी दी। श्रीकोट गांव के लिए समूह का निर्माण किया। वहीं आगाज के मास्टर ट्रेनर और उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद के फील्ड कोअार्डिनेटर प्रदीप कुमार ने रिंगाल और प्राकृतिक रेशा आधारित स्वरोजगारपरक योजनाओं की जानकारी दी। संस्था की भुवना देवी ने महिलाओं को माल्टा और बुरांस का जूस बनाने के तरीके समझाए। बैठक में मीनाक्षी देवी, मनोरमा देवी, देवकी देवी, चंद्रकला, नीमा देवी, पुष्पा देवी, गुड्डी देवी, भारती देवी, कस्तूरा देवी, नोमा देवी, संस्था के कार्यकर्ता पवन कुमार, उत्तराखंड बांस एवं रेशा विकास परिषद के जिला प्रबंधक आशीष सती आदि उपस्थित रहे।

आगाज़ फैडरेशन एवं सबकी सहेली फाउण्डेशन द्वारा अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर देहरादून में कार्यक्रम का आयोजन

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोलते हुए महिला आयोग की अध्यक्ष सरोजनी कैंतुरा ने कहा कि- महिलायें ही परिवार और समाज की आधारशिला हैं। आज के विकास के दौर में महिलाओं को कम आंका जाना ठीक नहीं है। सामाजिक समरसता, एकता और नेतृत्व के लिए महिला अधिकारों की पैरवी करना, महिलाओं के लिए प्रगति की राह बनाना हम सभी का परम कत्र्तव्य है। आगाज़ फैडरेशन एवं सबकी सहेली फाउण्डेशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि सामाजिक संचेतक के रूप में जिन महिलाओं को उनके संघर्ष और संचेतना के लिए सम्मानित किया जा रहा है वे समाज में आमूल-चूल परिवर्तन लायेंगी ताकि महिलायें गैर बराबरी का दंश ना झेलें।

कार्यक्रम में रमिन्द्री मंद्रवाल ने महिलाओं के प्रति बढ़ती हिंसा पर चिंता व्यक्त की साथ ही लिंग भेद के प्रति व्यापक जन जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया।

काउंसलर एवं मनोवैज्ञानिक डाॅ0 मुकुल शर्मा ने महिलाओं को अपने संघर्ष को जारी रखने के लिए प्रेरक एवं मनोवैज्ञानिक सलाह दी साथ ही एकजुट होकर बढ़ने की आवश्यकता पर बल दिया।

विशिष्ट अतिथि सी0ओ0सदर एस0पी0 क्राइम सुश्री तृप्ति भट्ट ने कहा कि जुल्म सहना सबसे बड़ा अपराध है घरेलु हिंसा और महिलाओं के मानवाधिकारों के हनन की सूचनायें बिना डर के एकजुट होकर तुरंत पुलिस और प्रशासन को दें।

महिलाओं को संबोधित करते हुए उपासना थापा ने कहा कि राजनैतिक नेतृत्व के रूप में सुशिक्षित होकर महिलायें समाज को नई दिशा दे सकती हैं इसके लिए एकजुटता बेहद जरूरी है। महिलाओं को संगठन बनाकर लड़ना होगा।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में महिला संचेतक के रूप में नंदिनी थापा, चंदर थापा, श्रीमती कमला थापा, श्रीमती अनीता घले, श्रीमती गीता राणा को महिलाओं के अधिकार, मदद के लिए सामाजिक संचेतना पुरस्कार प्रदान किया गया जबकि बुजुर्ग प्रेरक महिला सम्मान श्रीमान सुशीला क्षेत्री (उम्र 70 वर्ष), श्रीमती प्रभा शाह एवं श्रीमती दुर्गा राई को दिया गया।

श्रीमती शीतल मल्ल, पूजा सुब्बा एवं जे0पी0 मैठाणी द्वारा संयुक्त रूप से कार्यक्रम का संचालन किया गया। इस अवसर पर कई संगठनों के महिला प्रेरक, ग्रामीण महिलायें एवं जन प्रतिनिधि मौजूद थे !

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